Posts

Showing posts from April, 2021

Did Everything?

too many things to pass time with, but sorry, i did them all, nothing left to play with, i am now sitting idle in the hall. experienced every game and toy, played every instrument and sport, having them pass my time was kinda fun, feeling lonely and i want some support... by the passing hours, thinking what to do, today, i have did everything nothing left to do....

अतिथि कब जाओगे?

 तुम्हारे आगमन से बटुआ मेरा कांप उठा, इसे अपना ही घर समझ लीजिये....  यह कह कर हमने तुम्हारा स्वागत किया, परन्तु तुमने इसे अपना ही घर समझ लिया.... पहले दिन के भोजन को डिनर की उपाधि मिली... तुम जहाँ बैठ कर सिगरेट का धुआं फैला रहे हो, वहीं, पास में एक कलंदर भी है.... उसका भी कोई मान सम्मान होता है।  अतिथि बगवान होते है... परन्तु भगवान् भी 12 दिन के बाद चले जाते है।  आज तुम्हारा इकीसवाँ दिन है।   परन्तु तुम्हारे जाने की कोई इच्छा नई प्रतीत होती, देख रहे हो ना... प्रेम भरा नमस्कार अब घृणा और शोक में बदल गया है।  डिनर से आम भोजन और भोजन से अब उपवास के नौबत भी आ गयी है।  तुम स्मरण होगा की वह  दिन, जब  सारा सामान पैक करवाया था तुमने।  तुम्हारे प्रस्थान का समाये निकट था... परन्तु सुभे तुम्हारे ग़रारों की आवाज़ सुनकर हम चकित रह गए... तीन बार ट्रैन की टिकट भी बुक करवा चुके हो तुम... अतिथि , आखिर कब जाओगे तुम....